शनिवार को सर्राफा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। पिछले कुछ दिनों से ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रही कीमतों में आई इस नरमी ने खरीदारों को राहत दी है, जबकि निवेशकों के बीच आगे की दिशा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आइए जानते हैं शनिवार की गिरावट के पीछे मुख्य कारण, ताजा रेट, और आगे के संभावित संकेत।
शनिवार के ताजा भाव
अलग-अलग शहरों में रेट थोड़ा अलग हो सकते हैं, लेकिन शनिवार को औसतन:
24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम कुछ सौ रुपये तक सस्ता हुआ।
22 कैरेट सोना भी समान अनुपात में नीचे आया।
चांदी प्रति किलो में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई।
स्थानीय टैक्स, मेकिंग चार्ज और डिमांड-सप्लाई के कारण शहरवार अंतर संभव है। खरीद से पहले अपने शहर का लाइव रेट जरूर जांच लें।
गिरावट की मुख्य वजहें
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी
वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोने पर दबाव आता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना अपेक्षाकृत महंगा पड़ता है, जिससे मांग घटती है और कीमतें नरम पड़ती हैं। - मुनाफावसूली
हाल के उच्च स्तरों के बाद ट्रेडर्स ने मुनाफा बुक किया। तेज बढ़त के बाद ऐसी गिरावट सामान्य मानी जाती है। - केंद्रीय बैंकों के संकेत
ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख या लंबे समय तक ऊंची दरों के संकेत भी सोने-चांदी पर दबाव डालते हैं, क्योंकि ऊंची दरें फिक्स्ड-इनकम साधनों को आकर्षक बनाती हैं। - घरेलू मांग में हल्की सुस्ती
शादी-त्योहार सीजन के बाहर ज्वेलरी डिमांड अपेक्षाकृत कम रहती है, जिससे भाव पर असर पड़ सकता है।
क्या यह खरीदारी का मौका है
गिरावट को कई निवेशक “डिप पर खरीदारी” के अवसर के रूप में देखते हैं। हालांकि फैसला आपकी निवेश अवधि और लक्ष्य पर निर्भर करता है।
लंबी अवधि के निवेशक
यदि आपका लक्ष्य 2-5 साल का है, तो चरणबद्ध खरीदारी (SIP या किस्तों में) जोखिम कम कर सकती है।
छोटी अवधि के ट्रेडर
उतार-चढ़ाव ज्यादा होने से स्टॉप-लॉस और स्पष्ट रणनीति जरूरी है।
ज्वेलरी खरीदार
यदि शादी या पारिवारिक जरूरत है, तो गिरावट के दिनों में खरीद लाभदायक हो सकती है, लेकिन मेकिंग चार्ज और शुद्धता (BIS हॉलमार्क) जरूर जांचें।
चांदी पर क्या असर
चांदी का उपयोग औद्योगिक क्षेत्र में भी होता है, जैसे सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स। औद्योगिक मांग के संकेत और वैश्विक आर्थिक डेटा चांदी की कीमतों को ज्यादा प्रभावित करते हैं। शनिवार की गिरावट में चांदी ने सोने से अधिक उतार-चढ़ाव दिखाया, जो इसकी उच्च अस्थिरता को दर्शाता है।
आगे का संभावित रुख
- डॉलर और बॉन्ड यील्ड
यदि डॉलर मजबूत रहता है, तो कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है। - भू-राजनीतिक तनाव
तनाव बढ़ने पर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है। - घरेलू मांग
शादी-त्योहार सीजन करीब आने पर ज्वेलरी डिमांड बढ़ने से कीमतों को सहारा मिल सकता है। - केंद्रीय बैंक की खरीद
कई देशों के केंद्रीय बैंक सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। यह लंबी अवधि में समर्थन दे सकता है।
निवेश के विकल्प
फिजिकल गोल्ड
सिक्के, बार या ज्वेलरी। शुद्धता और सुरक्षित भंडारण का ध्यान रखें।
गोल्ड ETF
डिमैट के जरिए एक्सचेंज पर खरीद-फरोख्त। पारदर्शी और सुविधाजनक।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
सरकारी बॉन्ड, जिसमें ब्याज के साथ सोने की कीमत का लाभ मिलता है (जारी होने पर उपलब्धता देखें)।
सिल्वर ETF
चांदी में निवेश का आसान तरीका, बिना फिजिकल स्टोरेज की चिंता।
खरीदते समय ध्यान रखें
BIS हॉलमार्क जरूर जांचें।
मेकिंग चार्ज और वेस्टेज स्पष्ट पूछें।
रसीद और शुद्धता प्रमाणपत्र लें।
लाइव रेट की तुलना करें।
एकमुश्त की बजाय चरणबद्ध निवेश पर विचार करें।
निष्कर्ष
शनिवार को सोना-चांदी में आई गिरावट ने बाजार में हलचल जरूर पैदा की है, लेकिन यह उतार-चढ़ाव का सामान्य हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय संकेत, डॉलर की चाल और घरेलू मांग आगे की दिशा तय करेंगे। यदि आप निवेशक हैं, तो अपनी समयावधि और जोखिम प्रोफाइल के अनुसार रणनीति बनाएं। ज्वेलरी खरीदारों के लिए यह नरमी राहत दे सकती है, बशर्ते खरीदारी समझदारी से की जाए।